काश वो सब बिन कहे सुन लेता कांटे मेरे दामन के चुन लेता भर लेती उसे इन पलकों मे वो काश मेरे सपने बुन लेता वो शब्द बनता मेरे वाक्यांशों का या अंश बनता मेरे सारांशों का भर लेती उसे लय छंदो मे वो काश मेरी 'सरगम' होता
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें