देखकर आँखों मे भी वो क्यूं नही समझ पाये
क्या कमजोर इतना मेरा प्यार था
हमने छोड़ा ये जहां था उनकी दो आँखों के लिये
जिनमें मेरे लिये बेइंतहा प्यार था
शोले बन जायेंगे राहों मे बिछे जो फूल थे
अपनी किस्मत पे मुझे ऐसा नही ऐतबार था
सो चुके हैं सब परिंदे दूर कहीं नीड़ में
जिनका कबसे मुझे इंतजार था
साथ मेरे हर सफर मे हमसफर तो तुम ही थे
फिर मेरा दिल ऐसे क्यूं बेजार था