मंगलवार, 30 जून 2020

मुक्तक



तेरा ही तो ये बेहतरीन हुनर मुझमें आया है
खुदगर्ज हर शै के साथ तूने जीना सिखाया है
तेरी याद ही तो मेरे हर मर्ज की दवा है मां
तेरे लिए ही ये नासाज-ए-दिल भी मुस्काया है


गुरुवार, 18 जून 2020

तुम फिर याद आओगे



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तुम फिर याद आओगे
तुम्हे जाना है हमसे दूर बेशक चले जाओ
अपनी नई दुनिया नया सपना सजाओ
लेकिन उठके सुबह जब मेरा नाम बुलाओगे
याद करोगे तुम भी हमें #तुम फिर याद आओगे।

लोग तो बोलते हैं कुछ कुछ कहां तक सुनोगे
कब तलक मेरी खताओं का ताना बाना बुनोगे
रूठकर खुद से जब खुद नजरें चुराओगे
तड़पोगे मेरे बिन  हमें #तुम फिर याद आओगे।

सिकन नाकामियों की जब भी होगी चेहरे पर
कोई न होगा रोने को सर किसी कांधे पर
सहारा मेरे कांधे का फिर कहां पाओगे
नाकामियों में भी मेरी #तुम फिर याद आओगे।
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