थक गई है जिन्दगी अब मौत दे दो हद की है शर्मिंदगी अब मौत दे दो
भर चुका है ये घड़ा अब सबर का हो गया तैयार सामान कबर का विष भरी हो गई सहर अब मौत दे दो
कोशिशें कामयाब न होंगी कभी अब बाजुओं मे जान न होगी कभी अब लहु मे घुल गया जहर अब मौत दे दो