दिल से आह जो निकले खुदा गमगीन हो जाये,
अदावत हो किसी से गर मोहब्बत उससे हो जाये |
दुआओं में मेरे इतना असर रखना मेरे मौला-
हाथ उठ जाए गर ऊपर रहम की बरखा हो जाये ||
शिकायत गर करूँ मशहूर हो जाऊँ जमाने में,
सितम करके भी रुतबा उनका बढ़ता दिल दुखाने में |
करूँ अब क्या कि मैं मकसूद उनसे खामखा ही हूँ -
हम दिल थामे ही प्यासे हैं भरे इस मयखाने में ||
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