मुझे नीद नही आती कहीं कोइ तो सोया हाेगा
मुझे यादकर तकिये मे छुपकर रात भर रोया हाेगा
सिल लिये हैं होठ मैैने अब उम्रतलक के लिए
मेरे दर्द ओ जख्म पर कोई तो कुछ बोया हाेगा
आँख नम पलकों के पीछे छुप गए आँसू सभी
मेरी खुशियों के लिए भी कुछ कहीं पिरोया होगा
अमावस के रात सी काली हुई ये जिन्दगी
मेरे हिस्से का मेरा चाँद भी कहीं खोया होगा
आ गई किस मोड़ पे चलकर मैं तेरे साथ मे
किसी और को तूने अपने ख्वाब में संजोया होगा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें