बुधवार, 2 मार्च 2016

मुझे नीद नही आती कहीं कोइ तो सोया हाेगा
मुझे यादकर तकिये मे छुपकर रात भर रोया हाेगा

सिल लिये हैं होठ मैैने अब उम्रतलक के लिए
मेरे दर्द ओ जख्म पर कोई तो कुछ बोया हाेगा

आँख नम पलकों के पीछे छुप गए आँसू सभी
मेरी खुशियों के लिए भी कुछ कहीं पिरोया होगा

अमावस के रात सी काली हुई ये जिन्दगी
मेरे हिस्से का मेरा चाँद भी कहीं खोया होगा

आ गई किस मोड़ पे चलकर मैं तेरे साथ मे 

किसी और को तूने अपने ख्वाब में संजोया होगा

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